Monday, 6 July 2020

न्याय




मुल्ज़िम एक पंद्रह साल का लड़का था स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया
जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा
तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया
क्यों ? 
मुझे ज़रूरत थी
खरीद लेते :-- जज
पैसे नहीं थे :-- लड़का 
घर वालों से ले लेते 
घर में सिर्फ मां है बीमार है बेरोज़गार भी उसी के लिए चुराई थी।
तुम कुछ काम नहीं करते ? 
करता था एक कार वाश में मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी तो मुझ निकाल दिया गया।
तुम किसी से मदद मांग लेते। 
सुबह से घर से निकला था तकरीबन पचास लोगों के पास गया बिल्कुल आख़री में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई जज ने फैसला सुनाना शुरू किया :-

चोरी और ख़ुसूसन ब्रैड की चोरी बोहोत होल्नाक जुर्म है और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ समेत हम सब मुजरिम हैं इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है, दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यंहा से बाहर नहीं निकल सकेगा।
ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:-
इसके अलावा में स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले करा अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं करा तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।
जुर्माना की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट ने उस लड़के से माफी तलब करती है। 
फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे उस लड़के के भी हिचकीया बंध गई।वो लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गया।
ऐसे होते हैं ईमानदार जज।क्या हमारे देश में आज तक ऐसा कोई निर्णय दिया होगा।
हमारे देश में तो 20-20 और 25-25 वर्ष पश्चात जब कोई इन्सान बेकसूर सिद्ध होता है उसको उसको सिर्फ और सिर्फ माननीय न्यायालय बाइज्ज़त बरी कर देती है।

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